!! कहा-सुनी - ज़रा तमीज़ से !! . उसने कहा - सुनो, बड़े दूर दूर से लग रहे हो, क्यों? मैंने कहा - हाँ, जुमेरात को लड़े, तबसे न देखा, न छुआ तुम्हे, शायद इसीलिए. उसने कहा - क्या तुम्हे भी लग रही हूँ मैं, दूर? मैंने कहा - जी, जुमे के रोज़ मिल लेते, तो न होती इतनी तड़प, न दिखते इतने मजबूर. उसने कहा - मैं तुम्हारे 'जी' से समझ गयी, गुस्सा न मिलने का. मैंने कहा - नहीं समझीं, वो गुस्सा नहीं था, वो था पछतावा. उसने कहा - ठीक है, तुम मसरूफ़ हो, पर मैं भी नकचढ़ी, तो जब भी मांगना ख़ुद को, मुझसे, तो ज़रा तमीज़ से...😌 ~दिलीप पाण्डेय #KahaSuni #HindiPoetry #HindiUtsav #HindiLiterature #Kavita #Hindi #ZaraTameezSe #ChatPoetry #GoodDay🎯













