महजबीं से मोहम्मद अली, अब जीने को मोहताज...
महजबीं से मोहम्मद अली, अब जीने को मोहताज…
कुदरत के करिश्मे भी बड़े अजीब ओ गरीब हैं. मेहरबान हुई तो दुनिया की तमाम नेमतों से झोली भर दी और जरा सी नाखुश हुई तो जिंदगी को अजाब बना दिया. जिंदगी के 18 सालों तक महजबीं और अब मोहम्मद अली कुदरत के कुछ इसी नाराजगी का कहर झेल रहा है. ऊपर वाला इससे कुछ इस कदर नाराज है कि उसने इसे जिंदगी तो दी लेकिन उसमें मोहताजी का जहर भी घोल दिया. हर रात करवटों में गुजरती है तो हर सुबह एक टीस लेकर आती है. ऐसा क्यों…
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