कोकराझार से जोगीघोपा, ब्रह्मपुत्र किनारे!
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दिन भर चलने और 53 किमी नापने के बाद पता चला कि सहायता के नाम पर ठेंगा है। उन्हें एक मंदिर में रहने को कहा। मंदिर में पुजारी ने बताया कि जमीन पर सो जाईये। ओढ़ने बिछाने और भोजन का कोई इंतजाम नहीं।
27 अप्रेल 2023
मुझे याद है कि सन 2007-8 तक कोकराझार का नाम सुनने पर झुरझुरी सी छूटती थी। किसी अफसर की पूर्व-सीमांत रेलवे में तबादला हो जाये तो लगता था उसे कालेपानी की सजा हो गयी है। सन 2011 में बम्बई के ताज होटल में बैठे मेरे एक मित्र श्री एन.के. सचान, जो गुवाहाटी में मुख्य माल यातायात प्रबंधक, उत्तर-सीमांत रेलवे, थे; ने जब कहा कि ऐसा कुछ नहीं है तो एकबारगी उनपर यकीन नहीं हुआ था। सन 2011 तक…