मुझे बाहर निकालो" – एक गंध और रात का डर
मैं पहली बार अकेले रहने निकला था। शहर नया नहीं था, पर रातें अब पहले जैसी नहीं रहीं। दफ्तर के पास ही एक पुराना फ्लैट मिला — तीन मंज़िला इमारत, पतले रास्ते से अंदर जाना पड़ता था। बाहर बरगद का एक पेड़ था… जिसकी जड़ें नींव के नीचे तक फैली थीं। मकान मालिक एक 60 साल का शांत बुज़ुर्ग था। "बस साफ-सफाई रखना, और किराया टाइम पर देना," बस इतना ही कहा उसने। --- पहली रात... मैं लेटा ही था कि बाथरूम से एक गंध आई। थोड़ी सड़ी सी… जैसे कुछ पुराना गल रहा हो। मैंने सोचा — सीवर की बदबू होगी। खिड़की खोली, थोड़ा रूम फ्रेशनर छिड़का, और नींद में चला गया।
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