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Southern Pacific Alhambra Roundhouse is seen with passenger type steam locomotives in Los Angeles, California, late 40’s or early 50’s by alcomike43 on Flickr.
Via Flickr: Southern Pacific Alhambra Roundhouse is seen with passenger type steam locomotives in Los Angeles, California, late 1940’s or early 1950’s. The steam locomotive # 4413, seen in the foreground is Daylight class GS-2 Northern 4-8-4 streamlined steam locomotive. The steam locomotive # 4351, on the left is a MT-1 class, 4-8-2 Mountain type. Notice the semi-vanderbilt tender used behind the MT-1 Mountain class locomotive. You can observe various workmen throughout the roundhouse scene. Heavy steam locomotive repairs were performed at this railroad facility and roundhouse. Photo courtesy of an unknown source. The name of the photographer that took this photo is unknown. Copyright Disclaimer under Section 107 of the Copyright Act of 1976, allowance is made for “fair use” for the purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
MDT Highway 1 Rest Area, Anaconda, MT 20170517
My favorite rest area in the United States. I stay here overnight every time I head into Montana, whether it’s my half way point or not. It’s gorgeous and peaceful and there’s always a crispness in the air that’s rejuvenating.
Product Name:Melanotan-1 Alias: Melanotan-1, Melanotan I, Afamelanotide, Melanotan, CUV1647, EPT1647, NDP-MSH, [Nle4, D-Phe7]α -MSH CAS: 75921-69-6 Sequence: Ac-Ser-Tyr-Ser-Nle-Glu-His-D-Phe-Arg-Trp-Gly-Lys-Pro-Val-NH2 MF: C78H111N21O19 MW: 1646.845 Purity: 99% Specification: 10mg/vial Appearance: White Lyophilized Powder Place of Origin: China Method of Analysis: HPLC Storage: Lyophilized peptides although stable at room temperature for 3 months, should be stored desiccated below -18° C. Upon reconstitution of the peptide it should be stored at 4° C between 2-21 days and for future use below -18° C. Melanotan 1 (also referred to as Afamelanotide) is a synthetic peptide variant of a peptide hormone, called alpha-Melanocyte stimulating hormone or MSH that is naturally produced in the body and is responsible for stimulating melanogenesis, a peptide process for pigmentation of the skin. Alpha-MSH activates certain melanocortin receptors in the process of exerting its effects. Indeed, MSH also exerts potent influence over lipid metabolism, appetite, and sexual libido via these melanocortin receptors. As a result, Melanotan-1 sunless skin tanning effects. While Melanotan 2 and PT-141 have been studied at length as a potential remedies for the treatment of sexual dysfunction, Melanotan-has been researched extensively for use in protecting against the harmful effects of ultraviolet radiation from sunlight due to its melanogenesis-stimulating properties.
बाघिन टी-106 का मुकंदरा में स्वछंद विचरण शुरू
न्यूजवेव @ कोटा मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में टाइगर एमटी-1 का साथ निभाने आई बाघिन टी-106 ने बुधवार से दरा संरक्षित क्षेत्र के जंगलों में स्वच्छंद विचरण शुरू कर दिया है। वन्यजीव विभाग के सूत्रों के अनुसार, रिजर्व में बाघ एमटी-1 एवं बाघिन टी-106 का बसेरा हो जाने से मुकंदरा अभयारण्य के विकास में नए पंख लगे हैं।
Tiger T-106 मुकंदरा हिल्स अभयारण्य राज्य के चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौड़गढ़ में लगभग 760 वर्ग किलोमीटर में फैला है। वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, इसका क्षेत्रफल सरिस्का सेंचुरी से ज्यादा है। रणथम्भौर सेंचुरी में इस समय 62 से अधिक टाइगर होने से वहां के नर बाघ समीपवर्ती मुंकदरा रिजर्व में आकर अन्य मादा बाघ से क्रॉसबीड कर सकेंगे, जिससे निकट भविष्य में यहां टाइगर की हाईब्रिड देखी जा सकती है।
चंबल किनारे दरा के जंगल में बाघ, पैंथर, भालू, सांभर, चीतल, जरख (हाइना), भेड़िया, लोमड़ी, नीलगाय, काले हिरण, वनविलाव, खरगोश,दुर्लभ स्याहगोह, निशाचर सिविट केट और रेटल जैसे दुर्लभ वन्यजीव अनायास ही देखने को मिल जाते हैं। वन्य अधिकारियों के अनुसार, मुकंदरा क्षेत्र में लगभग 1000 चीतल, 60 भालू, 60 से 70 पैंथर, 60 नील गायों सहित बाघ प्रजाति के 6 बघेरा (लेपर्ड) भी हैं। बडी संख्या में छोटे वन्यजीव भी इस क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। Read the full article
टाइगर टी-39 की बेटी बनेगी मुकंदरा हिल्स की शान
नया बसेरा: वन्यजीव विभाग ने रणथम्भौर में बाघिन को किया टैंक्यूलाइज, अब मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में करेगी स्वच्छंद विचरण न्यूजवेव @ कोटा कोटा से 40 किमी दूर मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में इकलौते टाइगर एमटी-1 का साथ निभाने के लिए रणथम्भौर अभयारण्य से टाइगर-39 की बेटी ने मुकंदरा की धरा पर दस्तक दे दी है। हरियाली से आच्छादित वादियां, घने पहाड़, घाटियां, प्राकृतिक झरने, पोखर, तालाब एमटी-1 को बसेरा बसाने के लिए आमंत्रण दे रहे हैं।
Female Tiger याद दिला दें कि वर्ष की शुरूआत में कालंदा वनक्षेत्र में बाघ टी-91 ने पदचाप से अपनी दस्तक दी थी। जिसे एमटी-1 नाम देकर मुकंदरा हिल्स के संरक्षित क्षेत्र में खुले विचरण के लिए छोडा गया। इस टेरिटेरी में वह निरंतर घूमता रहा लेकिन रिजर्व में एक भी बाघिन नहीं मिलने से परिवार अधूरा रहा। इस बीच कानूनी बाधाएं हट जाने के बाद दिसंबर माह में दो बाघिनों को इस क्षेत्र में लाने की मुहित तेज हो गई। चंबल किनारे कोटा थर्मल पॉवर स्टेशन के परिसर में नर व मादा पैंथर व 3 बच्चे देखे जाने के बाद उनकी निरंतर निगरानी की जा रही हैं। 375 से अधिक चीतल आए वनविभाग ने संजय वन शाहपुरा से 22 चीतल लाकर मुकंदरा हिल्स के घने जंगल में छोड़ दिए। पिछले एक वर्ष से विभिन्न स्थानों से चीतल लाकर मुकंदरा क्षेत्र में छोडे़ जा रहे हैं। इनकी सख्या बढ़कर 375 से अधिक हो गई है। टाइगर के लिए शिकार हेतु प्री-बैस तैयार किया जा रहा है। 2018 में बसा बाघों का नया बसेरा
मुकंदरा हिल्स को 9 अप्रैल,2011 में मुकंदरा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। कोटा एयरपोर्ट से महज 40 किमी दूर यह नया अभयारण्य राज्य के चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौड़गढ़ में लगभग 760 वर्ग किलोमीटर मेें फैला हुआ है। इसमें लगभग 417 वर्गकिमी में कोर एरिया तथा 343 वर्गकिमी में बफर जोन होगा, जिसमें मुकुंदरा नेशनल पार्क, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर सेंचुरी तथा चंबल घडियाल सेंचुरी का कुछ भाग भी शामिल रहेगा। जानकारों ने बताया कि 1962 तक इस क्षेत्र में शेर दिखाई देते थे। 1980 के दशक में यहां बाघों की दहाड़ सुनाई देती थी। 2003 में भी एक बाघ ने यहां विचरण किया। 2018 में एक बाघ व एक बाघिन के आगमन से अब बाघों की गंूज सुनाई देगी। टाइगर की क्रॉसबीड के लिए अनुकूल
वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार, मुकंदरा रिजर्व का क्षेत्रफल सरिस्का सेंचुरी से ज्यादा है। रणथम्भौर सेंचुरी में इस समय 62 से अधिक टाइगर होने से वहां के नर बाघ समीपवर्ती मुंकदरा रिजर्व में आकर अन्य मादा बाघ से क्रॉसबीड कर सकेंगे, जिससे निकट भविष्य में यहां टाइगर की हाईब्रिड देखी जा सकती है। जलवायु की बात करें तो मुकंदरा टाइगर रिजर्व एवं नेशनल पार्क का नजारा बरसात में देखने लायक होता है। यहां 885.6 मिमी औसत वर्षा होती है। उंची पहाड़ियों के बीच खूबसूरत घना वन क्षेत्र, नदी व घाटियां है। इस हरे-भरे क्षेत्र में पलाश,अमलताश, नीम, जामुन, इमली, अर्जुन, तेंदू, बरगद, पीपल, महुआ, बेल, कदम, सेतल व आंवले के वृक्षों के साथ सघन जंगल है। यही वजह है कि चंबल किनारे बाघ, पैंथर, भालू, सांभर, चीतल, जरख (हाइना), भेड़िया, लोमड़ी, नीलगाय, काले हिरण, वनविलाव, खरगोश,दुर्लभ स्याहगोह, निशाचर सिविट केट और रेटल जैसे दुर्लभ वन्यजीव यहां देखने को मिलते हैं। वन्य अधिकारियों के अनुसार, मुकंदरा क्षेत्र में लगभग 1000 चीतल, 60 भालू, 60 से 70 पैंथर, 60 नील गायों सहित बाघ प्रजाति के 6 बघेरा (लेपर्ड) भी हैं। बडी संख्या में छोटे वन्यजीव विचरण करते हैं। 225 पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां पक्षी विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकृति की गोद में बसे इस क्षेत्र में लगभग 225 तरह के पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण हैं। इनमें दुर्लभ सफेद पीठ व लम्बी चोंच वाले गिद्ध, केस्टेड सस्पेंट, ईमल, शॉट टोड ईगल, सारस क्रेेन, पैराडाइज प्लाई केचर, स्टोक बिल किंगफिशर, कर्ड स्कोप्स उल्लू सहित बड़ी संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोर, कोयलों की गूंज पर्यटकों का मन मोह लेती है। चार जिलों में फैला है टाइगर रिजर्व
760 वर्गकिमी में फैला 342.82 वर्गकिमी बफर एरिया 417.17 किमी कोर एरिया नेशनल कोरिडोर - 1305 वर्गकिमी (वनभूमि- 958 वर्गकिमी, राजस्व भूमि-347 किमी) नेशनल पार्क- 205 वर्गकिमी कोरिडोर रेेंज- सवाईमानसिंह सेंचुरी, रणथम्भौर-आमली-इंद्रगढ़-लाखेरी-तलवास-रामगढ़ सेंचुरी से जवाहर सागर सेंचुरी तक पार्ट-1: सवाईमाधोपुर से रामगढ़ सेंचुरी (बूंदी) व आमली तक पार्ट-2: रामगढ़ सेंचुरी से जवाहर सागर सेंचुरी तक। कुल फॉरेस्ट ब्लॉक- 51 (बूंदी-36, सवाईमाधोपुर-8, भीलवाड़ा- 6, टोंक-1) जुडे़गा पर्यटन- रामगढ़ विषधारी, बूंदी, शेरगढ़ सेंचुरी, बारां, मुकंदरा नेशनल पार्क, दरा, राष्ट्रीय घडियाल सेंचुरी, कोटा व जवाहर सागर सेंचुरी, चित्तौडगढ़। बढे़गी इकोनॉमी- होटल, रेस्तरां, ट्रांसपोर्ट, एयर सर्विस, आर्ट, हस्तशिल्प व अन्य परिवहन सेवाएं। Read the full article