Sohrabuddin Fake Encounter Case all 22 Accused Acquitted By Court
सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर केस : अमित शाह समेत 16 आरोपी पहले ही हो चुके थे बरी, आज बाकी 22 भी बरी
2005 में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी के फर्जी एनकाउंटर के आरोप में विशेष सीबीआई अदालत ने 22 आरोपियों को बरी कर दिया। 22 में से 21 आरोपी गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के जूनियर स्तर के पुलिस अधिकारी थे, जबकि एक आरोपी उस फार्महाउस का मालिक था जहां कथित तौर पर शेख और उनकी पत्नी को हत्या के पहले रखा गया था।
इस मामले में मुकदमा पिछले दिसंबर से शुरू हुआ। पिछले साल, इस केस से सम्बंधित 210 गवाहों से पूछताछ की गयी, जिनमें से 92 अपने बयान से पलट गए। सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को दिए फैसले में कहा कि षड्यंत्र और हत्या साबित करने के लिए गवाहों के बयान और सबूत संतोषजनक नहीं हैं। परिस्थिति जन्य साक्ष्य भी किसी को दोषी करार दिए जाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
सीबीआई के अनुसार, 23 नवंबर, 2005 को, जब सोहराबुद्दीन शेख अपनी पत्नी कौसर बी के साथ बस से सांगली (महाराष्ट्र) जा रहा था, तब एटीएस, गुजरात के पुलिस कर्मियों द्वारा कथित तौर पर उनका हैदराबाद के पास से अपहरण कर लिया गया था। अपहरण कर, दोनों पति पत्नी को अहमदाबाद ले जाया गया, और 26 नवंबर, 2005 को सोहराबुद्दीन को गुजरात और राजस्थान पुलिस की पुलिस ने मार डाला था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि कुछ दिनों बाद, कौसर बी की हत्या हो गई थी और गुजरात में इलोल गांव के पास एक नदी के किनारे उसका मृत शरीर जला दिया गया था।
बता दें कि इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे। इनमें गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री और मौजूदा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत 16 आरोपी पहले ही बरी किए जा चुके हैं। बाकि बचे 22 आरोपियों को आज बरी कर दिया गया।
सीबीआई के अनुसार, तुलसीराम प्रजापति, जो की इस मामले का एक कथित प्रत्यक्षदर्शी और सोहराबुद्दीन के सहयोगी था, उसे राजस्थान के उदयपुर ले जाया गया था। एक साल बाद, दिसंबर 2006 में, गुजरात-राजस्थान सीमा पर चपरी के पास एक कथित फर्जी मुठभेड़ में उसकी भी हत्या कर दी गई। हालांकि, शुक्रवार के फैसले में सीबीआई कोर्ट ने तुलसीराम प्रजापति की साजिशन हत्या होने के आरोपों को गलत करार दिया है।
साक्ष्य के अभाव में सभी 22 आरोपी बरी
सीबीआई कोर्ट ने माना कि सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में किसी भी तरह की साजिश की गई है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सीबीआई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष किसी भी तरह की साजिश की बात साबित नहीं कर पाया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने सोहराबुद्दीन मामले में सारे 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। किसी के खिलाफ कोई चार्ज सिद्ध नहीं हुआ। सोहराबुद्दीन हत्या मामले में कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने हुई है, लेकिन गोली 22 में से किसी आरोपी ने चलाई थी, यह साबित नहीं हुआ। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि हमारा मुकदमा मेरिट के आधार पर लड़ा गया और अदालत का यह फैसला भी मेरिट के आधार पर ही आया है।
माना गोली से हुई सोहराबुद्दीन की मौत
इस चर्चित मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए अदालत ने स्वीकार किया कि सोहराबुद्दीन की मौत गोली लगने के कारण ही हुई थी। गोली लगने का अर्थ यह है कि उसकी हत्या की गई। यह बात तो अदालत ने मान ली। कोर्ट ने यह भी कहा कि सोहराबुद्दीन की हत्या किसने की, इस बात का कोई सबूत नहीं है।
कोर्ट में पेश हुए 210 गवाह
कोर्ट ने माना कि सरकार और एजेंसियों ने इस मामले की जांच में काफी मेहनत की, कोर्ट के समक्ष 210 गवाहों को पेश किया गया। लेकिन केस से जुड़े सबूत सामने नहीं आ सके। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष की गलती नहीं है कि गवाहों ने कुछ नहीं बताया।
अदालत ने खारिज की ये दलीलें
जज ने कहा कि कानून और सिस्टम को किसी आरोप को सिद्ध करने के लिए सबूतों की आवश्यकता होती है। सीबीआई इस बात को सिद्ध ही नहीं कर पाई कि पुलिसवालों ने सोहराबुद्दीन को हैदराबाद से अगवा किया था। इस बात का कोई सबूत नहीं है।
साक्ष्यों से साबित नहीं हुए आरोप
स्पेशल कोर्ट ने कहा है कि जो गवाह और सबूत अदालत में पेश किए गए हैं, वह किसी साजिश और हत्या को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा कि परिस्थिति के अनुसार जो भी साक्ष्य पेश किए गए वह भी आरोप सिद्ध नहीं करते हैं। इसके अलावा सीबीआई की विशेष अदालत ने तुलसीराम प्रजापति की साजिशन हत्या की बात को भी नहीं माना। अदालत ने कहा कि प्रजापति की हत्या की बात गलत है।
मुंबई स्थानांतरित हुआ केस
यह मामला पहले गुजरात में चल रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया था। अब 13 साल बाद अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। इस मामले की आखिरी बहस 5 दिसंबर को खत्म हुई थी। अब सभी 22 आरोपियों को सूबतों की कमी के चलते बरी कर दिया गया है। इन 22 लोगों को आज बरी किया
तत्कालीन डीएसपी मुकेश कुमार लालजी भाई परमार, गुजरात एटीएस के इंस्पेक्टर नारायण सिंह हरि सिंह धाबी, एटीएस इंस्पेक्टर बालकृष्ण राजेन्द्र प्रसाद चौबे, इंस्पेक्टर रहमान अब्दुल रशीद खान, राजस्थान पुलिस के सब इंस्पेक्टर हिमांशु सिंह राजावत, राजस्थान पुलिस के सब इंस्पेक्टर श्यामसिंह जयसिंह चरण, सिपाहबी अजय कुमार भगवानदास परमार, सिपाही संतराम चंद्रभान शर्मा, सब इंस्पेक्टर नरेश विष्णुभाई चौहानस, इंस्पेक्टर विजयकुमार अर्जुभाई राठौड़, फार्महाउस मालिक राजेन्द्रकुमार जीरावला, सब इंस्पेक्टर आंध्रप्रदेश पुलिस घट्टमनेनी श्रीनिवास राव, सब इंस्पेटर आशीष अरुणकुमार पंड्या, नारायण सिंह फते सिंह चौहान, युवधिर सिंह नाथूसिंह चौहान, करतार सिंह यादराम जाट, जेठू सिंह मोहनसिंह सोलंकी, कानजीभाई नरनभाई कच्छी, विनोदकुमार अमृतकुमार लिम्बाचिया, किरणसिंह हलाजी चौहान, करणसिंह अर्जुनसिंह सिसोदिया (सभी गुजरात व राजस्थान के पुलिसकर्मी), गुजरात सीआईडी के जांच अधिकारी रमनभई कोदारभाई पटेल
इन 16 को पहले ही क्या जा चुका है आरोपमुक्त
डी जी वंजारा (डीआईजी गुजरात एटीएस), जकुमार पांडियन (एसपी गुजरात), दिनेश एम एन (एसपी राजस्थान), नरेंद्र अमीन (डिवाय एसपी, गुजरात), अभय चुडासमा, (एसपी गुजरात), अमित शाह, (गृह राज्य मंत्री गुजरात), अजय पटेल, यशपाल सिंह चुडासमा, विमल पटनी (मार्बल व्यपारी), गुलाबचंद कटारिया (गृहमंत्री राजस्थान), एन एल बालसुब्रमण्यम (एसपी आंध्र प्रदेश), दलपत सिंह राठौर, (हेड कॉन्स्टेबल राजस्थान), प्रशांत पांडे, डीजीपी गुजरात, गीता जौहरी, आईजीपी गुजरात, ओम प्रकाश माथुर, एडीजीपी गुजरात, विपुल अग्रवाल, एसपी गुजरात
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