नमामि गंगे 🙏🌊💦🌊💦🌄 2024

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नमामि गंगे 🙏🌊💦🌊💦🌄 2024
तिब्बत सरकारद्वारा ३० टन अक्सिजन सहयोग
तिब्बत सरकारद्वारा ३० टन अक्सिजन सहयोग
काठमाडौं । ल्हासाबाट ३० मेट्रिक टन अक्सिजन नेपाल ल्याइँदै छ । तिब्बत सरकारको सहयोगमा सो अक्सिजन ल्याइन लागिएको हो । ल्हासास्थित नेपाली महावाणिज्य दूत नवलराज ढकालका अनुसार चीनको तिब्बत सरकारको सहयोगमा प्राप्त १५० सिलिण्डर लिक्वीड अक्सिजन नेपाल आउन लागेको हो। महावाणिज्य दूत ढकालका अनुसार बिहीबार ल्हासाबाट नेपालका लागि प्रस्थान गरेको उक्त अक्सिजन शुक्रबार राति खासा पुग्ने छ। अक्सिजनको उक्त परिमाणबाट…
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तिब्बती लोग बोधगया में दलाई लामा के लंबे जीवन के लिए प्रार्थना किया
तिब्बती लोग बोधगया में दलाई लामा के लंबे जीवन के लिए प्रार्थना किया
शिमला : केंद्रीय तिब्बती प्रशासन बिहार के बोधगया में 31 दिसंबर, 2018 को तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को लंबी जीवन प्रार्थना (तेनशग) प्रदान करेगा।
सीटीए की तेनशग पेशकश, दलाई लामा के लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए छह मिलियन तिब्बतियों की सामूहिक आकांक्षाओं और उनकी उत्कट प्रार्थनाओं का प्रतिनिधित्व करेगी।
CTA के एक अधिकारी ने कहा तिब्बती लोकतंत्र के तीन स्तंभ, साथ ही CTA के स्वतंत्र कार्यालयों के…
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लोब्सांग संगय ने के चीन पर लगाया आरोप
लोब्सांग संगय ने के चीन पर लगाया आरोप
तिब्बती : केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष लोब्सांग सांगय ने कहा कि चीनी एजेंट जानबूझकर तिब्बती समुदाय में घर्षण पैदा करने के लिए गलतफहमी और अफवाहें फैल रहे हैं। टोरंटो में तिब्बती कनाडाई संस्कृति केंद्र में तिब्बतियों के सदस्यों को संबोधित करते हुए, उन्होंने लोगों को सामाजिक मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करने में सामाजिक रूप से जिम्मेदार होने की सलाह दी। “सोशल मीडिया में जो साझा और पढ़ा…
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करीब 550 साल से ध्यान मग्न है यह संत
अगर आप इस ममी को ध्यान से देखेंगे तो आप को पता चलेगा कि यह ममी ध्यान की अवस्था में बैठी है यह ममी एक संत की तरह जो एक तपस्या में लीन रहता है। गांव वालो का कहना है यह ममी पहले नौगांव में रखी गई थी और एक स्तूप में स्थापित थी। यह ममी तिब्बत में है ऐसा हो सकता है कि यह ममी किसी बौद्ध भिक्षु की हो।
1974 में एक भयंकर भूकम आया था, भूकंप के कारण यह ममी मलबे के अंदर दब गई थी। यह ममी दोबारा तब मिली जब 1995 में ITBP के जवान सड़क का निर्माण कर रहे थे। तब ममी को बाहर निकालते हुए जब उसके सिर पर कुदाल लगा तो ममी के सिर से खून बहने लगा जिसका निशान आप आज भी इस ममी के सिर देख सकते हैं।
ITBP वालो ने इस ममी को 2009 तक अपने कैंपस में रखा। फिर बाद में गाँव वाले इसे अपने साथ ले गए और अपनी धरोहर मानते हुए गाँव वाले उसे अपने गांव में वापिस ले गये। इस ममी को एक शीशे के केबिन में रखा गया है और उसकी देखभाल गाँव वालो ने खुद संभाल रखी है। गांव वाले बारी-बारी इस ममी की देखभाल के लिए अपनी ड्यूटी लगाते हैं।जब ITBP ने इस ममी को बाहर निकाला था तब विशेषज्ञों ने इसकी जांच की थी और तब यह पता चला था कि यह ममी 545 वर्ष पुरानी है, लेकिन आश्चर्यजनक् बात ये है कि बिना किसी लेप के और जमीन में दबे रहने के बावजूद भी इस ममी की अवस्था आज भी वैसे ही है जैसे 500 वर्ष पूर्व थी। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि गियू गांव साल के 7-8 महीने भारी बर्फबारी होने के कारण बाकी पूरे देश से कटा रहता है।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि 15वीं शताब्दी में एक महान संत तपस्यारत गांव में रहते थे एक बार उस समय के दौरान गांव मे बिछुओ का अत्यंत प्रकोप हो गया तब बिछुओ के प्रकोप से बचने के लिए इस महान संत ने ध्यान करने की सलाह दी।
आंध्र प्रदेश की एक गुफा में छन भर के लिए कुछ लोग अनाम संत से मिले थे। लोगों का मानना है कि वह संत उसी समय ध्यान से उठे थे और उसी समय संयोग से उनसे मिले थे। उनका पहला प्रश्न वैदिक संस्कृति में था, “राजा परीक्षित कहां है?” जब उन्हें पता लगा कि यह कलयुग है तो वह पुनः ध्यान मुद्रा में चले गए।अगर हम उन लोगों की बात माने तो पता चलता है कि वह संत करीब 5000 वर्षों से जीवित थे। हिमालय में आज भी ऐसे कई अदृश्य कंदराएँ अस्तित्व में है जहां बड़े-बड़े तपस्वी तपस्या में लीन रहते हैं।