uhhuhhhuhuhh fuckin social cardd follow my socials if ye want idfk lol
tumblr dot com

pixel skylines
"I'm Dorothy Gale from Kansas"
$LAYYYTER

tannertan36
he wasn't even looking at me and he found me

@theartofmadeline
Claire Keane
KIROKAZE

No title available
š
2025 on Tumblr: Trends That Defined the Year
Monterey Bay Aquarium
Doug Jones
𩵠avery cochrane š©µ

blake kathryn
YOU ARE THE REASON
todays bird
ā
almost home
seen from United States
seen from United States

seen from United States

seen from United States

seen from Indonesia

seen from Slovakia

seen from United States

seen from United States
seen from United States
seen from Japan

seen from United States

seen from United States
seen from United States

seen from United States

seen from Brazil
seen from United States
seen from United States
seen from United States
seen from Germany
seen from United States
@tenacioustoonz
uhhuhhhuhuhh fuckin social cardd follow my socials if ye want idfk lol
PLEASEEE PORN BOTS PLEASEE STOP FOLLOWING MEE
I DONāT WANT THE BOTUSSY PLEASE IāM BEGGING
rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ
rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ
Reference sheets of the main characters of my āAUā Cendy for my comic. I also added several random data of the characters to add more context of them in the comic, I think there is also a bit of spoiler but hey ahhahā I wanted to do this to have a better reference of their details even if it doesnāt change so many things, now With this I plan to start with the comic:)) (even if you are interested in any information or have questions, you can ask!)
I swear I get sad if I wake up and one is on the floor
They are exploring under the bed! This is normal stuffed animal behavior, as they are trained to protect you from monsters and shadow creatures, so it's natural that they want to keep an eye out. Don't be sad, thank your friend for doing such a good job.
hsdkagkhsag literally me sorry
my mice <3
i had been planning on making something like these anyway but @rabbitstatic was doing them for their own AU so it kicked my ass in gear. Go look at their stuff too if you like FNATI!!! I yoinked some inspo for these from the way theirās were laid out.
Iām gonna do the others but I wanted the Mickey Clones done first.
iām tempted to make a account where i only follow my friends on there so i can see what they post lmao
No matter how much he tries to escape, heās still dancing in chainsā¦
mickey in ohio
Restless š
me after forgetting to take my meds and trying to sleep
A [[JPEG]], A [[digital_camera_click.mp3.exe]]
DONāT TELL ME IāM [[Feeling unwell?]]
(Song is āScroll Patrolā by Rinse And Repeat)
OMGOMGOMG THE LOOK THE STYLE THE AAAAAAAA
rereading some pokepastas does anyone want my totally factual and objective opinions of some of 'em ? šāšā
give me urĀ scientific analysis on pokepastas bestie
okay since you didn't specify a pasta and i'm burning with spite i'm gonna give y'all The Hottest Take I Got
,,,,,glitchy red is a bland creepypasta :/
bro glitchy red sounds generic asf wtfĀ ā ļø ā ļø ā ļø
rereading some pokepastas does anyone want my totally factual and objective opinions of some of 'em ? šāšā
give me urĀ scientific analysis on pokepastas bestie
Remember to scare the transphobes shitless by being gay as hell this Halloween š³ļøāā§ļø
make them cry and shit their pants for halloween
be sure to bring ur partner and kiss them in front of them to make them faint (mainly if itās a mlm or lesbian relationship but regardless you should bring ur partner out aswell if you want jksagd)
headshot for a friend of mine