एक ज़माना बीत गया (@ २७/१२/२०१४ , बंगलौर)
आज उनसे बिछङे हमको एक ज़माना बीत गया। चेहरे पर तेजस्वी आभा होंठों पर मुस्कान मंद, छरहरी,ऊँची कद-काठी हाथ छङी औ’ चाल बुलंद। देखे उस मुखर अनीक को एक ज़माना बीत गया। आज उनसे बिछङे हमको एक ज़माना बीत गया।। प्रातः ब्रह्म वेला में उठ कर भजन स्फुटित होता मुख से, फिर प्रभात-सैर को जाना शामिल था दिनचर्या में। प्रातः “विनय भजन” गूँजन को एक ज़माना बीत गया। आज उनसे बिछङे हमको एक ज़माना बीत गया।। अनुशासन…
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