REPEAT AFTER ME : I am about to walk into the greatest year of my lifeāØ
šŖ¼
will byers stan first human second
Monterey Bay Aquarium
Peter Solarz
h
Mike Driver
Claire Keane
Aqua Utopiaļ½ęµ·ć®åŗć§čØę¶ćē“”ć

blake kathryn

Janaina Medeiros
Misplaced Lens Cap
AnasAbdin
No title available
dirt enthusiast

tannertan36

No title available
"I'm Dorothy Gale from Kansas"

Kaledo Art
wallacepolsom
hello vonnie
seen from Ecuador
seen from Brazil

seen from United States
seen from United States
seen from United States

seen from United States

seen from United States
seen from United States
seen from United States

seen from United States
seen from United States
seen from United States
seen from United States
seen from United States
seen from Türkiye

seen from United States
seen from Russia
seen from United States

seen from Germany

seen from Singapore
@jied3gu
REPEAT AFTER ME : I am about to walk into the greatest year of my lifeāØ
Reblog if you don't have girlfriend or boyfriend.
All these single people andā¦ā¦
yupā¦
at walmarts bakery (i work in the deli) theres a computer for printing cake decals and theres always this t-posing cake with a stolen veggietales face on the homescreen
but i came in today and found him facing directly forward and no longer smiling
im terrified
he clearly needs to u to replace cyan
rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ
rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶrͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ rͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬͬaͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣͣtĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶĶ
this really is a website
cursed post cursed post
Thank Satan this post doesnāt work on mobile
Oh idk what itās supposed to look like just saw rat and hit reblog
On desktop the letters above the rats extend like two posts up. Idk how it works
Oh nice
Wait what does it look like on a computer?
oh! thanks tumblr!
Excellent!
Rebloging this to curse desktop users
:) Thanks!
Satan is that you???
One of the most important things I learned in my Language and the Law class is that law enforcement will intentionally misinterpret every type of statement asking for a lawyer as not asking for a lawyer. Even directly saying it like this āI will not speak to you without a lawyerā can be taken as a simple statement of fact rather than a request for a lawyer. You literally have to state āI am now invoking my right to a lawyerā and every time they try to proceed with an interrogation you have to answer every question with āI am invoking my right to have a lawyer presentā. You canāt just tell them you wonāt talk without a lawyer or that you want a lawyer. You have to state that you are invoking your rights. Otherwise they could just say āwell they just said they wouldnāt speak without a lawyer present. Thatās not invoking their rights to a lawyer. Itās just stating a fact.ā even just stating your right to a lawyer doesnāt count!
Itās literally getting to the point where you have to deal with cops the way you would with djinn or fae. Do not leave them even the slightest bit of wiggle room to screw you over. Be as clear and explicit as you POSSIBLY can.
Destroy the idea that white ppl with tattoos are edgy and poc with tattoos are dangerous
this is where scientists conducted genetic experiments on me
if i tell you any more theyāll put a price on my head
Cold spring - base game compatible male coat with new mesh, all LODās, all maps, 8 swatches, from teen to elder + Cas thumbnail.
Remember I released this āToo Hotā shirt? Well⦠Itās Too Cold now!:D
Download (No Ads) āāāāāāāāāāāāā- >>More Wistful Stuff<<
16 maxis match textures
Sim models from Avelinesims
DOWNLOAD
16 maxis match textures
Sim models from Avelinesims
DOWNLOAD
Jonas Hair
shouts out to the jo bros⦠this ones for u
info:
- available for both masculine & feminine frames
- base game compatible!
- hat compatible
- all 18 EA colours
- custom thumbnail
- disabled for random
download (sfs) | alt (dropbox)
- ĶĢ Ginny TopĀ ĶĢ-
A new top named after this cute bunny because I love bunners š°š
Comes in 25 swatches of my Pudding palette
Base Game Compatible
Has all LODs
Custom normal and shadow maps!
Custom Thumbnail
Download | Simfileshare | Dropbox
Let me know if you encounter any issues with my cc, thank you~ š
SIMSTROUBLE 70s Pants for Male & Female
Base Game Compatible
Maxis Match
Male & Female - Teen to Elder
19 Swatches
Normal mapĀ
Specular Map
All LODs
Custom Thumbnails
Download: Google Drive | Download Page
Š§ŠøŃŠ°ŃŃ Š“Š°Š»ŃŃŠµ
SIMSTROUBLE @ridgeportā BAD BOWLER RECOLOUR w/ mesh
Base Game Compatible
Maxis Match
Female Top
24 Swatches, Patterns & Corduroy
Shadow map
Normal map
All LODs
Custom Thumbnails
Mesh by @ridgeportĀ included, thanks for your cool TOU!Ā
Download: Google Drive | Download Page
TOU AND MORE INFO UNDER THE CUT
Š§ŠøŃŠ°ŃŃ Š“Š°Š»ŃŃŠµ
hi! sorry for the wait on this hair<3 I hope you like it!
bgc
comes in @qwertysims modified maxis palette
hat compatible
custom thumbnailĀ
simfileshare
also thank you to my lovely tester<3
Samuel & Edwin Hair
Full 18 ea swatches
Custom thumbnails
Basegame compatible
Hat compatible (mostly?)
Hope you like them! If you use them in your sims feel free to tag me iād love to see it :)
Download (SFS) Samuel | Edwin