सनातन के नाम पर किया केवल अज्ञान का प्रसार
तत्त्वदर्शी सतगुरु के मार्गदर्शन के अभाव में ब्रह्म को ही परमात्मा मानने वाले आचार्य प्रशांत जी का कहना है कि परमात्मा (ब्रह्म) का स्वरूप निराकार है।
वहीं तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने गीता, वेद, कुरान, बाईबल, गुरुग्रंथ साहिब, सूक्ष्मवेद (कबीर वाणी) आदि धर्मग्रंथों के प्रमाण लाइव दिखाकर यह सिद्ध किया है कि परमात्मा निराकार नहीं बल्कि साकार एवं नर आकार में अर्थात मनुष्य सदृश्य है।
सनातन के नाम पर हिंदुओं से हुआ धोखा
कृष्ण व काल ब्रह्म का भेद ना जानने के कारण आचार्य प्रशांत जी ने गीता अध्याय 4 श्लोक 5 के माध्यम से कृष्ण को सर्वज्ञ, निराकार ब्रह्म एवं उत्पत्ति कर्ता कहा है।
जबकि सूक्ष्मवेद (कबीर वाणी) में वर्णित तत्त्वज्ञान के साथ साथ गीता, वेद, पुराण, कुरान आदि ग्रंथों से संत रामपाल जी ने प्रमाणित किया है कि गीता का ज्ञान वासुदेव पुत्र श्रीकृष्ण ने नहीं बल्कि काल ब्रह्म ने दिया था। (प्रमाण - अध्याय 11 श्लोक 32 व श्लोक 47)
वहीं यह भी प्रमाणित किया है कि स्वयं गीता ज्ञान दाता काल ब्रह्म एवं उनका ब्रह्मलोक अविनाशी नहीं हैं अर्थात जन्म मृत्यु के अंतर्गत नाशवान हैं। वहीं काल ब्रह्म ने गीता के अनेक श्लोकों में अपने से अन्य सबका धारण पोषण करने वाले एक अविनाशी परमात्मा की महिमा की है। (प्रमाण - गीता अध्याय 10 श्लोक 2, अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5 व 9, अध्याय 8 श्लोक 16)