
seen from China
seen from United States

seen from Argentina
seen from United States
seen from China

seen from United States

seen from United States

seen from Netherlands
seen from Kenya

seen from United States

seen from Malaysia
seen from United States

seen from Singapore

seen from China
seen from China
seen from United States
seen from China
seen from United States

seen from Netherlands
seen from Czechia
Self musing! #diwana #scribble #scribbleart #art #music #painting #paintings #selfamused #passionate #creativity #creativephotography #sketch #preview #loveislove #love (at India) https://www.instagram.com/p/CfJm41_hjWX/?igshid=NGJjMDIxMWI=
#tumharibhijaijai #Mukesh #Sairabano #Diwana Tribute to #Shailendra and #RajKapoor #ShankarJaikishan #Shankar_Jaikishan #shankarjaikishan #Bollywood #bollywoodactor https://www.instagram.com/p/CXeEmAnFZGZ/?utm_medium=tumblr
पते की बात कहेगा कहेगा जब भी दीवाना
by
Shyam Shanker Sharma
1967 में निर्देशक महेश कौल की फ़िल्म दीवाना का प्रदर्शन हुआ था।इस फ़िल्म का प्रत्येक गीत शंकरजयकिशन के संगीत का रत्नजड़ित आभूषण था।ऐसे गीत जो सदियों तक गुनगुनाये जायेगे किन्तु इन गीतों का एक दुर्भाग्य भी था कि इन गीतों को राजकपूर पर फिल्माया गया जो इस फ़िल्म की सबसे कमजोर कड़ी थे तथा इस फ़िल्म का दुर्भाग्य थे। फिर भी यह फ़िल्म अपने गीत संगीत के कारण सदा याद की जाएंगी।सायरा बानू व राजकपूर अभिनीत इस फ़िल्म में फिल्मी कबीरदास शैलेन्द्र जी का एक बहुत ही खूबसूरत संदेश गीत था जिसे मुकेश ने बेहतरीन स्वर दिया व शंकरजयकिशन ने जिसे अपने संगीत की खूबसूरत माला पहनाई,किन्तु राजकपूर के अभिनय ने सब चौपट कर दिया।इन सबके उपरांत भी यह गीत शंकरजयकिशन ,शैलेन्द्र व मुकेश के बेहतरीन नगमों में शुमार किया जाता है और शुमार किया भी जाना चाहिए। यह गीत प्रत्येक मानव को प्रेरणा देता है जो भौतिक साधनों की प्राप्ति में व्यर्थ में भागा जा रहा है जिनका कोई अर्थ ही नही है।
पते की बात कहेगा कहेगा जब भी दीवाना मेरी सूरत पे न जाना मेरी सूरत पे न जाना!! यहां वास्तव में शैलेन्द्र दीवाने थे जो तीसरी कसम में राजकपूर को पहचान गए थे?अतः वह उनकी सूरत पर गए ही नही और जाते जाते तीखे व्यंग बाण राजकपूर पर बरसा गए। हम स्वयं का ही हित देखते है,स्वयं को ही सही मानते है,किसी को क्या कष्ट है यह जानने का प्रयत्न ही नही करते बस अपने स्वार्थों की पूर्ति में अपना सम्पूर्ण जीवन खत्म कर लेते है।यह जानते हुए भी की हम इस धरा के मेहमान भर है इस पर अपना स्थायी कब्जा करना चाहते है जो असंभव है।हम धन प्राप्ती को ही समस्त मान बैठते है और उसके मद में चूर होकर भोग विलास में अपना सम्पूर्ण जीवन लगा देते है,झूंठे आडंबर करते है!किन्तु उपर वाला सब जानता है,उसकी नजर सी सी टी वी कैमरे से ज्यादा तेज है वह कण कण की खबर रखतां है,हमारे प्रत्येक कर्म का लेखा जोखा उसके पास है,उसकी नज़रों से बचना असंभव है।तभी तो शैलेंद्र जी लिखते है.... वहां कुछ देर है प्यारे नही अंधेर है प्यारे जो तुझको न दिखाई दे नज़र का फेर है प्यारे तू बहकावे में न आना है उसका सब जग जाना मेरी सूरत पे न जाना.... संतोष ही जीवन का यथार्थ है।संतोष का अर्थ है जो हमारे पास है वही पर्याप्त है,बस आंख खोलकर उसे देखने की जरूरत है,आंखे खुली रहे तो वह छोटी से छोटी चीज भी पर्याप्त दिखाई देती है जिसे हम नज़र अंदाज़ करते आये है,जिसे कभी हमने देखने का प्रयत्न ही नही किया।जबकि वह छोटी से छोटी चीज भी समय पर अपनी महत्ता सिद्ध कर जाती है।रोटी तो रोटी ही होती है चाहे उसे पत्तल में खाओ अथवा सोने की थाली में उसका स्वाद नहीं बदलता?अतः महत्वपूर्ण यह है कि हमे रोटी मिल रही है महत्वपूर्ण यह नही हम किस पर रखकर खा रहे है,जब यही रोटी नसीब में नही होती तभी हमें उसके महत्व का पता चलता है।जब हमारी दृष्टि खुली रहती है तो जो कुछ भी है वह इतना अधिक प्रतीत होता है कि इसके लिए भगवान् को बार बार धन्यवाद करने को मन करता है। चाह बीज है और जीवन उसकी फसल है,जैसा बीज होगा ,फसल वैसी ही होगी।बीज यदि उत्तम हो तो फसल की पैदावार अवश्य अच्छी होगी ओर यदि बीज ठीक नही है तो फसल के होने में संदिग्धता एवं आशंका बनी रहती है।जन्मों-जन्मों से ,युगों युगों से जो हम चाहते रहे है,वही हमे मिलता रहा है।जो हमे मिला है वह हमारी चाहत का परिणाम है।हमारा वर्तमान जीवन हमारे अतीत की चाहत का ही परिणाम है,किन्तु कई बार ऐसा भी होता है कि हम सौचते कुछ और है और होता कुछ और है।इन परिस्थितियों में दुखी होने के स्थान पर संतोष का आश्रय लेने से व्यक्ति, मन से स्थिर व जीवन से संतुष्ट अनुभव करता है।जीवन मे चाहत कुछ और होती है परिणाम कुछ और मिलता है,यह विडंबना बारम्बार चलती रहती है।सफलता और असफलता की यह अंतहीन प्रक्रिया चलती रहती है,यह कभी समाप्त होने वाली नही है,क्योकि इसकी जड़ में जो चाहत है,वह न तो कभी थमती है और न ही विराम लेती है।आज एक चाहत उठती है तो उसके पूरा होने से पूर्व ही एक दुसरीं चाहत उठ खड़ी हो जाती है ओर चाहतों की यह कहानी अनवरत चलती रहती है।इसलिए सम्मान हो या सफलता,मान हो या प्रतिष्ठा,पद हो या उसकी गरिमा--ये सदा उन्हें मिलते है जिन्हें इनकी चाहत ही नही होती है। चार के आठ तू कर ले आठ से साठ तू कर ले रहेगा फिर भी यह खाली पेट को लाख तू भर ले सीख ले मन को मनाना सबर से काम चलाना मेरी सूरत पे न जाना... हम सब सुबह शाम खाते है,पेटभर खाते है किंतु फिर भी नित्य यह खाली हो जाता है,ठीक इसी प्रकार हम किंतना ही धनोपार्जन कर ले हमारी भूख ही नही मिटती?इन तृष्णाओं का अंत ही नही है। ओर हम इन तृष्णाओं के पीछे भागे जा रहे है।अधिक खाओगे तो स्वास्थ खराब होगा,ज्यादा धनोपार्जन करोगे तो कष्टो को निमंत्रण दोगे, यह भूख तो खत्म होने वाली नहीं है?किंतु यदि इसमे संतोष है,संतुलन है तो जीवन का आनंद है,स्मरण रहे हम किंतना ही कमा ले हमे खाली हाथ जाना है,संसार भर के हज़ारों महल,किले,हवेलियाँ इसके उदाहरण है जिन्होंने इन्हें बनाया उनके नामो निशान तक मिट गए,किंतनी भी फसलें उगा ले पेटो को तो नित्य खाली होना है,अतः संतोष में सुख है,संतुलन में सुख है,मन पर नियंत्रण जरूरी है क्योकि यह वह बिगड़ा घोड़ा है जो अच्छे अच्छे घुड़सवारों को जमीन पर गिरा देता है,यह उड़ता पंछी है।जिस ने मन को काबू में कर लिया उसका जीवन सफल हो गया।आज हम सका सब्र ही खत्म हो गया है जबकि सब्र से काम करना सदा सुखदायी होता है।कवि शैलेंद्र यही बात इस गीत के माध्यम से मानव को सरल भाषा मे समझा रहे है। शब्द ही ब्रह्म है,शब्द में ही शक्ति है,जो कार्य धारदार हथियार नही कर सकते वह कार्य प्यार के दो शब्द कर जाते है,जो कार्य लाखो लोग नहीं कर पाते वह प्यार से दिलदार कर जाते है,सभी के साथ प्यार से रहना ही भारतीय संस्कृति की निशानी है,प्यार से ही संसार है,प्यार में ही दुलार है,प्यार में ही जीवन है,प्यार में ही परमात्मा है,यही तो हमारी संस्कृति का पुराना चलन है।जब प्यार के संबंधों में दरारें आ जाती है तो जीवन नारकीय हो जाता है,सब कुछ होते हुए भी जीवन मे सर्वत्र निराशा छा जाती है।अतः प्रेम ही सुख की पूंजी है और धन उतना ही पर्याप्त है जो आपके जीवन की आवश्यकताओं को पूर्ण कर सके। साईं इतना दीजिये जामे कुटुम्भ समाये में भी भूखा ना रहूं साधु न भूखा जाय !! नदी का जल स्तर नियंत्रण में है तो सभी उसके किनारे बैठकर प्रकृति के सौंदर्य का आनंद लेते है किंतु जैसे ही उसका जल स्तर नियंत्रण से बाहर होता है तो बाढ़ का रूप ले लेती है और विनाश का कारण बन जाती है!अतः धन,मन व अन्न में संतुलन जरूरी है और जहां यह संतोष का भाव है वही प्रेम है,जीवन के सभी सुख विध्यमान है। स्वयं में संतुष्टि ही सफलता एवं सम्मान का द्वार खोलती है।जो स्वयं में संतुष्ट है,प्रकृति उन्हें स्वतःसफलता व सम्मान देती हैजो प्रकृति के नेसर्गिक गुण है।इन्हें चाहना क्या?जो है वह तो मिलेगा ही।जैसे वातावरण में हवा बह रही है,वह सबको उपलब्ध् है,इसकी चाहत कैसी? ठीक वैसे ही हमारी जितनी सामर्थ्य है,वह तो उपलब्ध् है ही---उसकी चाहत कैसी?हां! केवल इस सामर्थ्य को समझकर उसका समुचित उपयोग करने की आवश्यकता है। शैलेन्द्र जी ने इस गीत को सरल शब्दों में दीवाने के माध्यम से शायद यही समझाने की चेष्ठा की है जो अनुपम है।ऐसा प्रतीत होता है कि फ़िल्म दीवाना के गीत तीसरी कसम के निर्माण के दौरान अथवा इससे पूर्व ही लिख दिए थे।शंकरजयकिशन का बेहतरीन संगीत इस गीत को प्राप्त है।यह कैसी विडंबना है कि राजकपूर को फ़िल्म दीवाना,सपनो का सौदागर तथा अराउंड द वर्ल्ड फिल्मो में शंकरजयकिशन ने बेहतरीन गीत संगीत प्रदान किया किन्तु राजकपूर के कारण ही यह सभी फिल्मे धराशाही हो गई,उनका अभिनय इन फिल्मो को ले डूबा, ओर यह असफलताये शंकरजयकिशन के संगीत के पतन का कारण बनी,तीसरी कसम व जोकर का संगीत अजर अमर था और बेशक इन दो फिल्मो में राजकपूर का उत्तम अभिनय भी था,फिर भी इन फिल्मो को भी राजकपूर सफलता न दिला सके!इन्ही सब कारणों से शंकरजयकिशन के संगीत की स्वर्णिम आभा पर समय के काले बादल छा गए और उनका संगीत ग्राफ 1966 से 1970 के मध्य बेहतरीन संगीत देने के उपरांत भी गिरता गया जिसमें सबसे बड़े कारण सिर्फ राजकपूर थे,यह विडंबना है। Shyam Shanker Sharma Jaipur,Rajasthan.
#chai #tealover #diwana #diwani #khayaal #sham #winter #memories #soch #ishoaibameer (at Uttarakhand) https://www.instagram.com/p/Br1n5fLHSlz/?utm_source=ig_tumblr_share&igshid=bffxo1m5jho3
Agar aap kisi ko apna deewana karne ka amal chahte hai to Molvi Sufi Sultan ji se rabta kare aur Kisi ko mohabbat me deewana karne ka amal hasil kare.
Kisi Ko Apna Deewana Karne Ka Amal Allah ke Sabhi Bando Ko Molana Ahamad Ali Ki Dua or Salam. Apni Har Dua Me Main Aapki Keriyat Ki Dua Karta Hu. “Uska Pana Hi Manjil Tere Mat Kar takaza Mohabbat …
If you are looking Mohabbat Me Deewana karne Ka Amal then Then Consult our World’s Famous Astrologer Molvi Abdul Hameed Khan Ji se and Mohabbat Me Deewana karne Ka Amal . For more info visit @ https://duaistikhara4love.wordpress.com/2018/07/02/apni-mohabbat-ko-hasil-karne-ka-strong-amal/
Agar aap pyar me diwana karne ka wazifa, taweez, amal, aur dua pana chahte hai to dua for lost love expert molvi Sufi sultan ji se rabta kare aur apne pyar me diwana karne ka amal hasil kare.