धारा 6 : रेस जेस्टे का सिद्वान्त या एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्य | साक्ष्य विधि
धारा 6 : रेस जेस्टे का सिद्वान्त (Doctrine of Res Gestae) साक्ष्य विवादस्पद विषयों के निस्तारण एवं सत्य का पता लगाने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। विवादास्पद विषयों के सम्बन्ध में साक्ष्य की गुणवत्ता महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। तथ्यों की सुसंगति यह निर्धारित करती है कि, किसी न्यायिक कार्यवाही में क्या तथ्य किसी पक्षकार द्वारा साबित किये जा सकते है और उन्हें साबित करने के साधन एंव तरीके क्या है? यह भी जाने - साबित, नासाबित व साबित नहीं हुआ की व्याख्या | धारा 3 धारा 6 : रेस जेस्टे का सिद्वान्त अथवा एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्य धारा 6 में यह प्रावधान है कि - "जो तथ्य विवाद्यक न होते हुए भी किसी विवाद्यक तथ्य से इस प्रकार संसक्त हैं कि वे एक ही संव्यवहार के भाग हैं, वे तथ्य सुसंगत हैं, चाहे उसी समय और स्थान पर या विभिन्न समयों और स्थानों पर घटित हुए हों।" उदाहरण – क पर ख की पीटकर हत्या करने का आरोप है। क या ख या पास खड़े लोगों द्वारा जो कुछ भी पिटाई के समय या उससे इतने अल्पकाल पूर्व या पश्चात् कहा या किया गया था कि वह उसी संव्यवहार का भाग बन गया है, वह सुसंगत तथ्य है। संव्यवहार का तात्पर्य है - "कि कार्यों की लड़ी कुछ इस तरह होनी चाहिये कि वह एक-दूसरे से पूर्णतया जुड़े हों। यदि ऐसा हो तो उन कार्यों में एक दूसरे के समय की निकटता एक महत्वपूर्ण मायने रखती है।" स्टीफेन ने अपने डाईजेस्ट में कहा है कि - "संव्यवहार तथ्यों के ऐसे समूह को कहते हैं जो एक-दूसरे से इतने जुड़े रहते हैं कि उन्हें एक ही नाम दिया जा सकता है जैसे कि कोई अपराध, संविदा, अपकृत्य अथवा जाँच पड़ताल का कोई भी ऐसा विषय जो विवाद्यक हो। सामान्य तौर पर संव्यवहार किसी भी भौतिक कार्य (Physical acts) के लिये प्रयोग किया जा सकता है या एक के बाद एक होने वाले भौतिक कार्यों के लिये जिसमें वे कथन भी सम्मिलित होंगे जो कार्य या कार्यों के साथ होते चले गये थे| 'रेस जेस्टे' का सिद्धान्त : धारा 6 धारा 6 में जिस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया गया है उसे रेस जेस्टे का सिद्धान्त' (Principle of Res gestae) कहा जाता है। शब्द 'रेस जेस्टे' का शाब्दिक अर्थ है 'सम्बन्धित तथ्य'| यह शब्द लैटिन भाषा का है जिसका अर्थ है - “जो काम किया गया है” और अंग्रेजी में इसका अर्थ है - “ऐसे कथन या कार्य जो किसी संव्यवहार के साथ हुए है, यह सिद्वांत आंग्ल विधि पर आधारित है| इस प्रकार धारा 6 के अनुसार ऐसे तथ्य जो विवाद के बिंदु नहीं है, लेकिन वे तथ्य विवाद की विषय वस्तु से इस तरह जुड़े हुए है कि वे तथ्य उस घटना यानि एक ही संव्यवहार के ही भाग समझे जाते है, चाहे वे एक ही समय एंव स्थान पर घटित हुए हो या अलग अलग समय एंव स्थान में घटित हुए हो, सुसंगत तथ्य माने जाते है, रेस जेस्टे कहलाते हैं। यह भी जाने - साक्ष्य क्या है, परिभाषा एंव साक्ष्य के प्रकार | Definition of evidence in Hindi जनतेला वी राव बनाम स्टेट ऑफ आन्ध्रप्रदेश का एक प्रकरण जिसमे एक बस को आग से जला दिया गया था जिससे काफी लोग क्षतिग्रस्त हो गये। उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया तथा मजिस्ट्रेट द्वारा उनके कथन लेखबद्ध किये गये। इन कथनों को एक ही संव्यवहार का भाग नहीं माना गया, क्योंकि वे घटना के काफी समय पश्चात् किये गये थे। (ए.आई.आर. 1996 एस.सी. 2791) रेस जेस्टे का तात्पर्य है - एक ही संव्यवहार का भाग होने वाली घटनायें। रेस जेस्टे को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि वह मुख्य तथ्य की आनुषंगिक बात और उसे स्पष्ट करने वाली बात है जिसमें कार्य (act) और शब्द (word) भी शामिल है जो उससे इस प्रकार से घनिष्ट रूप से सम्बन्धित होते हैं कि वे एक ही संव्यवहार के भाग होते हैं और बिना उनके ज्ञान के मुख्य तथ्य को ठीक से नहीं समझा जा सकता है। रेस जेस्टे एवं अनुश्रुत साक्ष्य - अनुश्रुत साक्ष्य का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जिसने घटना होते नहीं देखी बल्कि उस घटना के बारे में उस व्यक्ति से सुना है जिसने वह घटना होते देखी है| इस तरह ऐसा व्यक्ति साक्ष्य नहीं दे सकता है क्योंकि उसका ज्ञान अनुश्रुति पर आधारित है| लेकिन अनुश्रुत साक्ष्य तब दिया जा सकता है जब वह घटना का भाग हो, इस तरह रेस जेस्टे का सिद्धान्त अनुश्रुति (Hearsay) के साक्ष्य को अस्वीकृत करने के सिद्धान्त का एक अपवाद प्रस्तुत करता है। रेस जेस्टे के रूप में ग्राह्य साक्ष्य – (i) अपराध किये जाने के स्थान और समय पर अभियुक्त द्वारा किया गया कथन, (ii) स्त्री के विरुद्ध लैंगिक अपराधों में किसी तीसरे व्यक्ति को किये गये कथन, (iii) वसीयतकर्त्ता द्वारा विल के रजिस्ट्रीकरण के समय किया गया कथन (iv) दत्तक ग्रहण के प्रश्न पर विनिश्चय में दत्तक-विलेख (v) वचनपत्र पर किसी पर्दानशीन महिला द्वारा किये गये हस्ताक्षर के बारे में उसके पति का कथन आर. एम. मालकानी बनाम स्टेट ऑफ़ महाराष्ट्र में यह निर्णित किया गया है की जब कोई ऐसी बातचीत चल रही हो जो किसी संव्यवहार का भाग होने के कारण सुसंगत है तो यदि उसे तत्क्षण या उसी समय टेप कर लिया जाए तब ऐसी टेप सुसंगत तथ्य होगी तथा यह रेस जेस्टे होगी| अधिक जाने - धारा 6 : रेस जेस्टे का सिद्वान्त अथवा एक ही संव्यवहार के भाग होने वाले तथ्य Read the full article
















