पंचायत सीज़न 4 की समीक्षा: राजनीतिक के साथ रियायती अभिषेक, लेकिन दर्शकों को कुछ अधूरा सा लगा
प्राइम वीडियो की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज 'पंचायत' का चौथा सीजन आखिरकार रिलीज हो गया है। पिछले तीन सीज़न की फ़्लोरिडा के बाद इस नए सीज़न में दर्शकों को काफी पसंद आया। लेकिन जैसे ही ये सीज़न सामने आया, सोशल मीडिया पर मिले जुले का रिव्यू देखने को मिला।
चुनाव की हलचल, लेकिन कहानी में खो गया धर्म?
सीज़न 4 की कहानी इस बार पंचायत चुनाव के अंत-गिर्द घूमती है। जहां इस बार कुछ दर्शकों को लगा कि पुरानी कहानियों में वो आकर्षण नहीं रहे।
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हा, अब ठीक ठाक है
पहले से अच्छी नहीं है
बहुत ही बढ़िया है
Voting ended onJul 1, 2025
मिश्रित प्रतिक्रिया: कुछ को मजा आया, कुछ को नहीं
एक यूज़र ने लिखा, "पंचायत 4 ठीक-ठाक है, लेकिन बाकी सीजन्स जितना मजा नहीं आया।"
वहीं, दूसरे ने इसे "इमोशन, ह्यूमर और राजनीति का परफेक्ट कॉम्बिनेशन" बताया।
किसी ने क्लाइमैक्स को सराहते हुए लिखा, "अंत में जो हुआ, वो चौंकाने वाला था।"
कुछ लोगों को शिकायत रही कि "गांव की मासूमियत और दमदार डायलॉग इस बार गायब थे।"
परफॉर्मेंस की फिर भी तारीफ
जितेंद्र कुमार, रघुवीर यादव और नीना गुप्ता की अदाकारी इस बार भी मजबूत रही। खास तौर पर विनोद का किरदार लोगों को पसंद आया, जिसे बड़ी बारीकी से लिखा और निभाया गया है।
क्या सीरीज को खींचा जा रहा है?
कई दर्शकों का मानना है कि कहानी को अब जबरदस्ती आगे बढ़ाया जा रहा है। कुछ एपिसोड्स में ढीलापन महसूस होता है और संवाद पहले जैसे गूंजते नहीं हैं।
पंचायत सीजन 4 एक नई दिशा में गया है — राजनीति, भावनाओं और सामाजिक मुद्दों को केंद्र में लाकर। हालांकि, इस बदलाव से हर कोई खुश नहीं है। पुराने सीजनों की सादगी और दिल को छू लेने वाली कहानियां इस बार कुछ हद तक गुम होती नजर आईं।
अगर आप पंचायत के पुराने फैन हैं, तो इस सीजन को जरूर देखें