दुखद और भावुक दृश्य: बुढ़ापे में बुजुर्ग माता-पिता… भारत में बुज़ुर्ग माता-पिता की उपेक्षा अब केवल नैतिक मुद्दा नहीं, बल्कि क़ानूनी अपराध भी है। सरकार ने बुज़ुर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू किया है।
इस कानून के तहत—
माता-पिता बच्चों, बेटियों और यहाँ तक कि पोते-पोतियों के ख़िलाफ़ ट्रिब्यूनल में शिकायत कर सकते हैं।
अदालत हर महीने भरण-पोषण भत्ता (₹10,000 तक या राज्य सरकार द्वारा तय सीमा) देने का आदेश दे सकती है।
आदेश न मानने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
सेवा की शर्त पर दी गई संपत्ति वापस ली जा सकती है।
माता-पिता को लावारिस छोड़ने पर सज़ा का प्रावधान है।
यह वीडियो बुज़ुर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और समाज को ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए है। हर माता-पिता और हर संतान को यह जानकारी ज़रूर जाननी चाहिए।















