अनेक बातों के बीच जो बातें लिखी जाती वो उन बातों से ज्यादा बड़ी नहीं हो सकती जो लिखी नहीं गई। कहीं न जाना कहीं जाने से कम नहीं हो सकता। किसी को न छू सकना किसी को छूने से कम भी नहीं हो सकता। दुख कभी भी सुख से कम नहीं होता। वो ठीक वैसा होता है जैसा सुख। बस दो नाम है।
-praphull.

















