दिल बे-करार
अभी तो उनसे मिले भी नहीं हम
और ये दिल बे-करार होने लगा है
न तो उसे देखा और न ही उसे जाना
फिर भी मन में एक धुन गूंज रहा है
अजब बात है – उसकी बात में
सिर्फ बात ही छिड़ी है
और यहाँ रोम रोम मुस्कुरा रहा है
पर चुपके से अन्दर एक सवाल टहल रहा है
जैसे वह सोच रहा है
यह हकीक़त नहीं बल्कि एक धोखा है
जैसे रेगिस्तान में पानी का धोखा है
या फिर यह सिर्फ एक डर की अपनी बनाई…
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