और रह गया छोटा अपने दम पर
वक़्त की घड़ी में बंध गए माँ बाप
समय नहीं दे पाये ये दिखा साफ़ साफ़
ना सुना पाये हनुमान चालीसा ना पढ़ा पाये गीता का पाठ
ना मिलपाये कुछ दोस्त ना खिलौने ना बेट बोल
बस अकेला घूमता रहा बच्चा गोल गोल
बच्चे को बोला इच्छा ना रखो
बढ़ गए हैं खिलौनों और टीवी के दाम
ना दी हाथ में लाठी ना साइकिल ना तलवार
जब लड़के ने पकड़ी कड़छी तो पुकारा गया लड़की बार बार
ना मन का पहनो ना पढ़ो ना करो ज़ुबान पे धार
हमारी हाँ में हाँ करो तो ही रहेगा सूखी परिवार
ना पढ़ने दिया जो चाहता था बच्चा
फिर जब कम गुण आए तो नहीं रहा में उनका पुत्र अच्छा
बच्चे ने मांगा ना पैसा ना खिलौने ना कोई बड़ी फ़रमाइश
कहा काटो बाल वरना ना करना हमसे बात
रहे नहीं अब तुम हमारे हाथ
अब जो करना है खुदकी मर्ज़ी का तो
नाप लूँ अपना रास्ता अपने आप
बच्चा बचपन में ही हुआ बड़ा
ना किसीने दिया साथ ना बढ़ाया हाथ
आज हर भीड़ में होता है सबसे छोटा फिर भी सबसे आगे
अपनी उम्र बताए तो माने ना कोई उसकी बात
बच्चा भागता रहा मिले रास्ते में कई हमसफर
हाथ किसीने पकड़ के ना रखा
बच्चे ने ना किसी से कहा दुख ना दर्द ना माँगी दया
बच्चा अब कहे बस लोटादो मुजे मेरा बचपन जो मुझसे छीन गया
ना चाहिए मुजे रुपया ना पैसा ना गाड़ी ना बड़ा घर
लौटादो मेरा बचपन जो छीना था मुझसे कल
ना चाहिए कोई हाथ ना साथ ना दोस्त ना कोई साथी
बस देदो मेरे हिस्से का खिलौना मेरा लकड़ी का हाथी
ना चाहिए खुशिया ना शांति ना चैन ना कोई सुख
है मुजे माँ की ममता की भूख
मत दो मुजे समजदारी होशियारी काबिलियत का सम्मान
लौटादो मुझे मुझसे छीना मेरा बचपन