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By : Ankita Bangwal (अल्फ़ाज़)
Virgin
He : Oh girl, you are not Virgin!
Me(sigh) : hmm, I do have a soul
©️@.b.
Scars!
प्यार नहीं व्यापार..🖤
मैं समझती हूं अंधेरे का होना भी अच्छा है
आपके मन में उस दीये के लिए सम्मान बना रहता है
उम्मीद, सुख समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशी का वो दीया आपके आसपास के ही नहीं
बल्कि मन के अंधेरे को भी रोशन करे
दिन रोशन हो
शाम रोशन हो
एक दिन ही नहीं बस, हर पल रोशन हो!
दिवाली की शुभकामनाएं🎊
-अल्फ़ाज़
Desire 💞..
Dreams💥
किसी का चंदा मामा, किसी के मेहबूब सा हुआ... दुनिया को रोशन करके चंदा, तू ही क्यों तन्हा हुआ?
ग्लानि : Repentance
तेरी खुशबू
मेरे आसपास थी वह एक खुशबू सुबह से एकदम बेचैन जो थी मैं सब कुछ तो खत्म कर चुके थे तुम और मैंने भी तुम्हारे लिए हां की थी। फिर भी मन अशांत था घर में कोई न होने के बावजूद एक कोलाहल-सा था मैं इस कमरे से उस कमरे तक चक्कर काट रही थी। सुन्न था दिल मेरा और आंखें आंसू बहा रही थी। मैं कभी पानी गर्म करने रख रही थी, तो उसे कभी बस बहा रही थी कुछ तो था, जिसकी वजह से यह हरारत थी। तुम छोड़ चुके थे मुझे मेरी राह भी अधूरी थी। फिर भी कुछ था, जो बेचैन थी मैं तुम्हारे तोहफे भी एक बैग में रखे थे मैंने और खुद से वादा किया था तुम्हारे जाने के बाद वो भी छोड़ दूंगी जो तुमने मुझे दिया था। जब सब कुछ लौटा दिया फिर क्यों मैं बेचैन थी? शायद, तुम्हारी आदत,तुम्हारी यादें, तुम्हारी डांट तुम्हारा प्यार, तुम्हारी नाराजगी, तुम्हारा गुस्सा, हंसना और मुझे रुला देना, सब कुछ मेरे पास रह गया था। मैं इधर-उधर झांक रही थी। एक टूटी रूह भी सुबक रही थी। मैं लेटी थी और सेच रही थी, क्यों इतना बेचैन हो रही थी। कुछ तब भी पास था मेरे,यह उसकी ही घबराहट-सी थी। जब थक-हारकर बैठ गई मैं रोते-रोते भी थक गई मै। फिर भी इधर-उधर जो झांक रही थी मालूम चला वो खुशबू तेरी थी जिसकी वजह से बेचैन थी मैं।
-अंकिता बंगवाल
किस्सा फिर वही था, बस लफ्जों का फेर था। ....और वो फिर से सपनों का गुलिस्तां बुन बैठी।
-अल्फाज
बादल
तुम भी इन बादलों की तरह हो कभी खूब बरसते हो, कभी बस यूहीं थम जाते हो तुम्हारी गड़गड़ाहट की आदत सी जब भी लगती है मुझे तुम अक्सर चुपचाप फिर चले जाते हो कहीं