DAY 3617
Jalsa, Mumbai Feb 16/17, 2018 Fri/Sat 1:39 AM
प्रतिदिन जब मैं , अपने आप को, शीशे में देखता हूँ , तब मैं अपना परिचय अपनी conscience से करता हूँ । नग्न वेश में वो मुझे, और मैं उसे, देखता हूँ , उससे बात करता हूँ , बहस करता हूँ , चीख़ता चिल्लाता हूँ , सवाल जवाब करता हूँ , नाराज़ होता हूँ , प्रसन्न होता हूँ ; और अंत में केवल इस नतीजे पे निकलता हूँ ; की मेरी conscience मेरी अपनी है , किसी और की तो नहीं । मेरी conscience को ये मत बताओ की उसे किस प्रकार चलना चाहिए , उसका व्याहार कैसा होना चाहिए , उसका चरित्र किस प्रकार का होना चाहिए । ना । मेरी conscience मेरे हिसाब से सही है , उसका निर्माण मत करो । उसे तुम असर कर सकते हो , लेकिन उसे बदल नहीं सकते । और साथ में ये भी नहीं कह सकते की मुझे अपना conscience बदलना चाहिए । मेरे conscience को तुम बदलोगे ?? हहहाहाहा , ये सम्भव नहीं होगा ।
मेरा मस्तिष्क मेरी खुराक पे चलता है , उसे कोई बाहर से खिलाने की कोशिश करेगा तो विफल हो जाएगा । अब मत मेरा निर्माण करो ।।
…… मेरा कुछ सोच समझ अपमान करो तुम !!
ये मत समझ लेना की अपने विचार यहाँ , मैं दूसरों के भय या डर से करता हूँ । वो सब जो मेरे साथ हैं , ये परख लेते हैं, लोगों को, मैं किस तरह उनसे व्यवहार करता हूँ । गोल गुलाई में मैं अक्सर बात करता हूँ , लेकिन इस आशा में मत रहिएगा की उनका रहस्य मैं कभी दर्शाऊँगा । और ये भी ना सोच लीजिए गा की दूसरों के विषय के साथ मैं , लुका - छुपी खेल रहा हूँ । आपको अभी इतना महत्व नहीं मिला है मेरे जीवन में । जितना मिला है उतना मैंने सब को हिस्सा हिस्सा बाँट दिया है ।
प्रणाम चरण स्पर्श
अमिताभ बच्चन












