10 May, 2020
मदर्स डे मतलब वो एक दिन जब आप 364 दिन भागती-दौड़ती उस माँ को धन्यवाद देते हैं जिसको कोई फर्क नही पड़ता की आप उसे कुछ दे रहे हैं। क्यूँकि इससे ने उसकी रफ्तार मे कोई वृद्धि होती हैं ना ही उत्साह में। आपने जिसको धन्यवाद दिया है उसने आपको अपनी जिंदगी दे रखी हैं। यही भेद है कि आपका धन्यवाद भी इतना प्रभाव नही डाल पाता जितना उसका मौन रोज अपना प्रभाव छोड़ देता हैं। जहाँ दुनिया आपको कुछ पिलाकर सुला देने में लगी हैं वो आज भी आपको नींद से उठाकर कुछ खिलाने के लिए बैठी हैं। रक्त प्रवाह रुकने से लेकर प्राण प्रवाहित होने तक जिसका प्रेम अखण्ड हैं, अभेद हैं, अविरल हैं वो माँ हैं। प्रेम प्राकट्य की वस्तु नहीं है और मां के संदर्भ में तो बिल्कुल भी नहीं, उसका देखना भर प्रेम है, कभी किसी बात का जवाब नहीं देना भी प्रेम हैं, घर से निकलते वक्त उसका मन में कहना कि ध्यान रखना प्रेम हैं, आपकी बीमारी में नीम-हकीम, वैद, पण्डित, तांत्रिक, बाबा, गुरु बन जाना प्रेम हैं, अपनी जरूरत कभी हमसे ना कहना प्रेम हैं, आपकी जरूरत को पड़ने से पहले उसका समझ लेना प्रेम हैं, खाना क्या बनाना हैं यह रोज पूछना प्रेम है, आपका चिल्लाना और उसका सुन लेना प्रेम हैं, मेरी ही औलाद धीठ हैं ऐसा कहना ही प्रेम हैं, आपको जिन्दगी देकर भी जिन्दगी भर एहसान नहीं जताना प्रेम हैं। माँ को रुलाना आसान है, माँ को हसाना आसान है, वो इतनी आसान है कि सब मुश्किल है जानते हुए भी उसको हराना आसान नहीं है।
यह दिन अच्छा है!
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