26 जनवरी, गणतंत्र दिवस - वैश्विक इतिहास में लिखा गया एक सवर्णिम दिन. आज ही के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में लिखे गए स्वतंत्र भारत के संविधान को 1950 में पूरे देश के लिए लागू किया गया था। भारतीय संविधान हमें अपने अधिकारों और अधिकारों से अवगत कराते हुए, संविधान हमें अपने कर्तव्य का बोध कराता है
संविधान सभा जब भारतीय संविधान को अंतिम रूप दे रही थी, उसके मसौदे पर बहस कर रही थी, उस दौरान संविधान बनाने वालों को इस बात की भी चिंता थी कि भारतीय संविधान ऐसा हो जो भारतीय सभ्यता-संस्कृति से जुड़ा हुआ दिखे. जिस तरह जड़ के बिना कोई विशाल दरख़्त नहीं टिक सकता, उसी तरह संस्कृति से जुड़े बिना भारतीय संविधान भी स्थायी नहीं रह सकता।
"सा प्रतिमा संस्कृत विश्ववारा" अर्थात भारत की संस्कृति दुनिया की पहली, सबसे पुरानी और सर्वोच्च संस्कृति है.
अनादिकाल से भारतवर्ष में अनेकों शासक हुए हैं जिन्होंने अपने पराक्रम से “प्रजा के लिए, प्रजा के द्वारा और प्रजा के साथ” गणराज्य की स्थापना कर उदाहरणीय सुशासन किया. हमारे संविधान ने भारतीय इतिहास की विकास यात्रा को दर्शाते हुए उसके प्रत्येक पहलु का चित्रण किया है. राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ को पहले पन्ने पर लगाया गया.
"संघ और उसके क्षेत्र" के अध्याय को मोहन जोदड़ो के द्वारा दर्शाया गया है. जिसे दुनिया का सबसे पुराना नियोजित और उत्कृष्ट शहर माना जाता है।
संविधान के "नागरिकता" अध्याय, भारत के वैदिक युग द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया है, जिसमें गुरुकुल के माध्यम से शिक्षित, विकसित और जिम्मेदार नागरिक बनाये जाते थे, जो देश निर्माण में अपना योगदान दे सकें.
श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता के द्वारा "मौलिक अधिकारों" के अध्याय में चित्रित किया गया है। मौलिक अधिकार, भारत के नागरिकों के बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं। भगवान श्रीराम को धर्म का प्रतीक माना जाता है और उन्होंने कर्तव्य की भावना को ध्यान में रखते हुए, रामराज्य में उचित तरीके से शासन करने के उद्देश्य को निर्धारित किया है जिसमें एक अच्छा गणराज्य होने के लिए व्यवहार में पारदर्शिता, कर्तव्यनिष्ठा, जाति का भेदभाव न होना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्याय व कानून की समानता, अधिकारों का संरक्षण पर विशेष बल दिया है। और यही सब भारतीय संविधान की रीढ़ भी है.
हम भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म उस युग में हुआ है, जब सभी भारतीयों के आदर्श और गौरव के प्रतिक भगवान् श्री राम के भव्य मंदिर के पुनर्निर्माण के माध्यम से गणराज्य से राम राज्य की स्थापना की जा रही है.
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं.